सत्ता जब अनैतिक तरीके से पायी और चलायी जाये तो उससे उपजा अपराध भाव सियासतदानों को एक हास्य कलाकार से भी डरा देता है। फिर उसकी आवाज़ दबाने के लिये कानून की बजाय राज्य अपनी मशीनरी तथा संगठन की ताकत का बेजा इस्तेमाल करता है। कुछ ऐसा ही हुआ है रविवार को मुंबई के खार स्थित हैबिटेट कॉमेडी क्लब में, जहां प्रसिद्ध हास्य कलाकार कुणाल कामरा का शो हुआ था जिसमें उन्होंने मौजूदा राजनीति पर करारे व्यंग्य कसे थे और किसी का भी नाम लिए बिना नेताओं की अवसरवादिता पर कटाक्ष किया था। इससे नाराज़ शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यकर्ताओं ने आयोजन स्थल में जमकर तोड़-फोड़ की, साथ ही कामरा के खिलाफ मामला दज़र् कर दिया गया है और उन्हें देश भर में कहीं भी न घूमने-फिरने की चेतावनी दी जा रही है।
कामरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(1)(बी) और 356(2) (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया है। वैसे कुणाल के जिस मज़ाक पर शिंदे गुट के शिवसैनिक नाराज़ हैं व एफआईआर दज़र् है उसमें न तो उप मुख्यमंत्री का नाम लिया गया है और न ही पार्टी के किसी नेता का उल्लेख है। उल्लेखनीय है कि करीब तीन वर्ष पहले शिवसेना और एनसीपी, इन दोनों दलों में जो फूट पड़ी थी, उस पर कुणाल कामरा ने यह कहकर तंज कसा था कि 'शिवसेना से शिवसेना निकल गयी और एनसीपी से एनसीपी निकल गयी।' साथ ही उन्होंने शिंदे को संकेतों में गद्दार कहा।
राज्य की भाजपा-शिवसेना (शिंदे गुट) व एनसीपी (अजित पवार गुट) की सरकार तथा पार्टी कार्यकर्ताओँ को कुणाल की कॉमेडी ऐसी नागवार गुजरी कि उन्होंने आयोजन स्थल में जमकर तोड़फोड़ की। जिस के बाद 11 उपद्रवी गिरफ्तार हुए हैं। उधर पुलिस ने शिवसेना विधायक व पार्टी प्रवक्ता मुरजी पटेल की शिकायत के आधार पर कुणाल कामरा के खिलाफ को एफआईआर दर्ज की। इतना ही नहीं, मुम्बई महानगरपालिका का एक दस्ता क्लब को जमींदोज़ करने हेतु भेजा गया। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कामरा की कॉमेडी को 'अपमानजनक' बतलाते हुए कहा कि 'यह सहन नहीं किया जायेगा।' जबकि शिवसेना विधायक और मंत्री प्रताप सरनाइक का कहना है कि तोड़फोड़ जैसे काम का वह सरकार में होने के नाते समर्थन नहीं करते, लेकिन मंत्री होने से पहले वे शिवसैनिक हैं और जो हमारे नेता का मज़ाक उड़ाएगा उसे शिवसैनिक छोड़ेंगे नहीं। इस घटना पर शिवसेना कार्यकर्ताओं का खून उबाल मार रहा है और नेता उसे जायज ठहरा रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि कुणाल को महाराष्ट्र ही नहीं हिन्दुस्तान भर में कहीं भी घूमने-फिरने नहीं दिया जायेगा। ठाणे से शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के का कहना है कि 'कामरा एक अनुबंधित कॉमेडियन हैं।
मगर उन्हें सांप की पूंछ पर पैर नहीं रखना चाहिए था। एक बार जब नुकीले दांत बाहर आते हैं तो परिणाम भयंकर होते हैं।' म्हस्के ने आरोप लगाया कि 'कामरा ने उद्धव ठाकरे से पैसे लिए हैं और एकनाथ शिंदे को निशाना बना रहे हैं।' उन्होंने कहा कि 'हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वे देश में कहीं भी घूम न सकें। हम दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के शिवसैनिक हैं। अगर हम उनका अनुसरण करने लगे तो कामरा को देश छोड़ना पड़ेगा।'
गौरतलब है कि कुणाल कामरा समकालीन परिघटनाओं और राजनीति को अपने व्यंग्य के विषय बनाते हैं। एक मायने में उन्हें साहसी व चैतन्य कलाकार माना जाता है जो देश-विदेश की घटनाओं पर अपने तरीके से अपनी राय जाहिर करते हैं। स्टैंडअप कॉमेडी के अलावा वे सोशल मीडिया के जरिये भी सक्रिय रहते हैं। स्वाभाविक है कि उन्हें इस नाते कई लोगों की नाराज़गी का सामना करना पड़ता है। अनेक प्रसिद्ध हस्तियों से वे उलझ भी चुके हैं। 2020 में इंडिगो की एक फ्लाइट में उनकी मुलाकात सत्ता समर्थक माने जाने वाले एंकर अर्नब गोस्वामी से जब हुई तो उन्होंने गोस्वामी की पत्रकारिता पर तीखे सवाल किये। इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी किया। अर्नब गोस्वामी ने कामरा की किसी भी बात का जवाब नहीं दिया तो कॉमेडियन ने यह कहकर उनका मज़ाक उड़ाया कि वे सबसे सवाल तो पूछते हैं लेकिन खुद की बारी आयी तो चुप्पी साध गये। हालांकि इसका उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा। उन्हें कई एयरलाइंस ने अलग-अलग अवधियों के लिये बैन कर दिया था। कुछ ने आजीवन प्रतिबन्ध लगा रखा है।
ओला इलेक्ट्रिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भाविश अग्रवाल से उनकी सोशल मीडिया पर भिड़ंत होती रहती है। भाविश ने जब ओला गीगा फैक्ट्री की एक फोटो शेयर की तो उसके जवाब में कामरा ने ओला इलेक्ट्रिक स्कूटरों की फोटो डाल दी थी और कंपनी की सेवाओं पर सवाल खड़े किये थे। 2022 में हरियाणा के गुरुग्राम में उनके शो को बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद ने रद्द करा दिया था। खुद को 'वीएचपी से बड़ा हिंदू' बतलाते हुए कामरा ने वीएचपी को लिखे पत्र में नाथूराम गोडसे की निंदा करने हेतु ललकारा था। एक बार उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का छेड़छाड़ से एडिटेड वीडियो जारी कर दिया था। हालांकि उन्होंने उसे हटा दिया था पर वे सरकार और भारतीय जनता पार्टी की नज़रों में आ गये थे। बाल संरक्षण आयोग ने भी उन्हें इसके लिये चेतावनी जारी की थी। वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी करने से उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की तैयारी थी।
कुणाल कामरा के साथ जो हो रहा है वह दरअसल एक असहिष्णु तथा आलोचना को सहन न करने वाले नेताओं के द्वारा सरकार चलाने का प्रतिफल है। भाजपा व शिवसेना तथा उनके जैसी पार्टियों के नेता, जो स्वयं अपने विरोधियों की निन्दा करने के लिये शालीनता तथा मर्यादाओं की तमाम सीमाएं लांघ जाते हैं, खुद के विरूद्ध एक भी शब्द सुनने को राजी नहीं होते। यह रवैया अलोकतांत्रिक तो है ही, घबराये व अपराध भाव से ग्रस्त सियासत की भी मानसिकता है। याद रहे कि हाल ही में लेक्स फ्रिडमैन के साथ अपने चर्चित पॉडकास्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने आलोचना करने के पक्ष में बयान दिया था, लेकिन उनके अपने नेता और सहयोगी इसके खिलाफ आचरण कर रहे हैं और श्री मोदी फिर से चुप लगाकर बैठे हैं।